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धेर्य पूर्वक मस्से खत्म करे !

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धेर्य पूर्वक मस्से खत्म करे ! आज हम आपको आयुर्वेद का सबसे विश्वसनी ओषधि तेल को बनाना और उसके फायदे बताएगे | जिसका उपयोग सभी प्रकार के मस्सो में कर सकते है, एवम यह गुदा की वल्ली को नुकसान नहीं पहुचता | इस तेल को धेर्य रख कर ३ से ४ माह तक लगाने पर आपके मस्से पूरी तरह से समाप्त हो जाते है | इसे बनाने की विधि-  कसीस, लांगली (कलिहारी ), कुठ, सोंठ, पीपल, सेंधानामक, मैनसिल, कनेर की छाल, चित्रकमूल, अडूसे के पत्ते, दंतीमूल, दंतिमुल, कडवी तोरई के बीज, सत्यानाशी, की जड़, हरताल सब को १-१ तोला जल में पीसकर लुगदी बनावे | फिर तिल तेल ६४ तोला, थूहर का दूध ८ तोला, आक का दूध ८ तोला और गो मूत्र २५६ तोले ले | सबको बड़ी कड़ाई में मिलाकर मन्दाग्नि पर पकाये, फिर तुरंत छान ले |         शा.स. नोट - यदि आप हमारी संस्था से बना बनाया तेल चाहते हो तो mail करे |          ayurvediccurecenter@gmail.com    

त्रिफला गुग्गुल - आयुर्वेद का तोहफा

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त्रिफला गुग्गुल  - आयुर्वेद का तोहफा त्रिफला जैसे विकृत मेद  का लेखन, पाचन एवं क्लेद का नाश करने वाले द्रव्यों से निर्मित यह गुग्गुल मेदोवह स्त्रोतस के विकारो में श्रेष्ठ औषध है। त्रिफला उत्कृष्ट लेखन कार्य करता है। मेदोवह स्त्रोतस का सबसे महत्वपूर्ण विकार है, स्थौल्या (मोटापा ). त्रिफला गुग्गुल के प्रयोग से मेदधात्वग्निवर्धन, अपचित मेद एवं क्लेद का लेखन होता है।

स्मृति शक्ति एवं बुद्धिवर्धक

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स्मृति शक्ति एवं बुद्धिवर्धक शंखपुष्पी - सर्वोत्तम मेध्य रसायन शंखपुष्पी के पंचांग को छाया में सुखाकर कूट पीस चूर्ण कपड़ छान कर रख लें। ऐसा शंखपुष्पी चूर्ण ६ ग्राम और इतनी ही मात्रा में मिश्री पाउडर ले कर ऊपर से एक ग्लास गाय का दूध पीना चाहिए। नोट - यह प्रयोग शीत और सर्द मौसम में करें।

नाड़ी विज्ञान ( नाडी परीक्षा)

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नाड़ी विज्ञान  करस्यांगुष्ठमूले या धमनी जीवसाक्षीणी । तच्चेष्टया सुखं दुखं ज्ञेयं कायस्य पण्डितः ।। शा. पु । दोषानुसार नाड़ी गति  दोषप्रकोप   अंगुली                     गति 1 वातज        तर्जनी    -    वक्र- सर्प के समान। 2 पितज        मध्यमिका  -  चंचल - काक, मण्डूक। 3 कफज       अनामीका  -  मंद- हंस या पारावत । 4 वातपितज   तर्जनी- मध्यमिका - वक्रचंचल 5 वातकफज   तर्जनी- अनामीका - वक्रमंद  6 पितकफज  अनामीका- मध्यमिका- कभी मंद, कभी चंचल  7 त्रिदोषज    तर्जनी-मध्यमिका-अनामीका- तीनो दोष समान

उर्जा को कम करने वाले खाने से सावधान रहे:

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उर्जा को कम करने वाले खाने से सावधान  रहे: जैसे की उर्जा को बढाने के स्त्रोत होते है ठीक वैसे ही उर्जा को कम करने के भी स्त्रोत होते है जैसे की फास्ट फूड, डिब्बाबंद, जमे हुए, पैक, बचे हुए, या पुराने खाद्य पदार्थ जो की  पचाने में मुश्किल होते हैं और इनमे पोषण संबंधी  सामग्री बहुत कम होती है | यदि आप इन खाद्य पदार्थों में से कुछ खाते हैं, और खाने के बाद आपको भारी महसूस होता है,   तो आपको क्या करना हैं  - आधा गिलास पानी पीने के लिए ले, जिसमें ताजा नींबू रस (¼) निचोड़ा ले या पाचन की सहायता के लिए दीपन पाचन टेबलेट ले। यदि आपको लगता है की आपको  ऊर्जा  की जरूरत है तब  अपको उर्जा  वाले आहार भोजन में शामिल करना चाहिए, बजाये कृत्रिम बूस्टर पर भरोसा करने से  क्योंकि इनसे  हमेशा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

उच्च-ऊर्जा वाला खाना खाये

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यह आपको आश्चर्यचकित कर सकता है, लेकिन वास्तविक ऊर्जा-बूस्टर ताजे फल, सब्जियां, मसालों और अनाज हैं। ये  उर्जा से संपन्न खाद्य पदार्थ हैं  जब आप इन्हें खा लेते हैं तो शरीर में थकावट पैदा करने वाला विषाक्त पदार्थ जमा नहीं हो सकता।  अनाज: अनाज उर्जा का एक अच्छा स्त्रोत है| सबसे पौष्टिक कार्बोहाइड्रेट पूरा अनाज होता है | जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने , कैंसर पैदा करने वाली गतिविधि और आंतों में हानिकारक बैक्टीरिया को रोकते हैं, और रक्त ग्लूकोज स्तर कम करते हैं। बाजरा को सबसे अधिक पौष्टिक  माना जाता है|  क्योंकि उनमे विशेष रूप से प्रोटीन और खनिजों की मात्रा अधिक होती है | ये फाइबर में भी युक्त होते है,  वे वैदिक ग्रंथों में वर्णित एक ही शुभ अनाज हैं और वेदिक समारोहों के लिए उपयोग किया जाता है |बाजरा  विटामिन बी का एक अच्छा स्रोत है |  सब्जियां और फलों:   अन्य उच्च ऊर्जा वाले खाद्य पदार्थों में ताजा सब्जियां शामिल हैं, जो कि चालीस प्रतिशत भोजन का होना चाहिए। ग्रीन, पत्तेदार सब्जियां विशेष रूप से खनिजों और फाइबर में अधिक होती हैं, ...

बस दो दिन में फोड़े फुंसी ख़त्म करे (removes boil and pimples)

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जलजमनी या छिलिहिंट (cocculus hirsutism) जो की गुडूची कुल की है, इसकी प्रसरणशील, रोमश लता पाठा के समान होती है। गुण - लघु, स्निग्ध, पिच्छिल । रस - तिक्त । प्रभाव- विषघ्न। त्वचा में कुष्ठघ्न होने के साथ यह रक्तभाराधिक्य एवं रक्तविकारों में प्रयुक्त होता है । चेहरे पर अधिक फुँसियाँ या फोड़े हे तो बस इसकी पत्तियों को घिसकर लेप तैयार करना है और उसे फुंसियो पर इस्तेमाल करना है, 1-2 दिनों में फुंसियो का नामो निशान ख़त्म करे।