अरुचि (अरोचक)

भूख लगने पर खाया हुआ भोजन का निवाला अच्छा न लगे, खाने की रूचि न हो, भोजन की बात मात्र से,  गंध आने और देखने से जो वितृष्णा हो उसे अरुचि कहते है ।

लक्षण:-
अरुचि में मुँह का स्वाद कसैला, दन्त खट्टे, मुँह का स्वाद चरपरा तथा दुर्गन्धित, प्यास अधिक लगती है जलन बहुत होती है, भारीपन, ठंडक, थूक गिरना ,मोह, मूर्च्छा, जड़ता तथा मन की व्याकुलता आदि ।

चिकित्सा :-
1 शंख वटी - दिन में तीन बार 1-1 गोली
2 गंधक वटी - भोजन के 2 घंटे बाद 1-1गोली
3 द्राक्षासव -20 ml और 20 ml पानी भोजन के बाद

Comments

Popular posts from this blog

त्रिफला चूर्ण है उत्तम रसायन एवं मृदु विरेचक ।

त्रिफला गुग्गुल - आयुर्वेद का तोहफा

Tips of Guduchi ( गिलोय ,अमृता)