प्रतिश्याय (जुकाम)
कारण:-
ऋतुचर्या के विपरीत काम करना, अधिक क्रोध, अधिक बोलना, रात्रि जागरण, अधिक सोना, अधिक रोना, अजीर्ण या बदहजमी, मल मूत्र आदि के वेग को रोकना, ठण्ड लगना, पानी में भीगना, धुँए आदि के कारण एवम् नाक में धूल आदि का जाना, अधिक मैथुन इन सब कारण से मस्तिष्क में कफ का जमा होना, और बढ़ी हुई वायु जुकाम को उत्पन्न करती है ।
वात, पित्त और कफ एक साथ या अलग अलग भी इसको उत्पन्न करते है ।
लक्षण:-
पूर्व रूप में छीके आना, सिर में भारीपन, अंगो में अकड़न, अंगो का टूटना, गले में खुजली का अनुभव, नाक व मुँह से स्त्राव, नाक से धुँए जैसी हवा निकलना ये सब जुकाम होने के पूर्व लक्षण है ।
चिकित्सा:-
1- अदरक रस 1ml और शहद 1ml मिलाकर चाटना ।
2 भुने हुए चने जुकाम में फायदेमंद है ।
3 अग्नि कुमार रस 2-2 गोली पानी से।
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